हैदर अली का उत्थान | आंग्ल मैसूर युद्ध | Haider Ali ka utthan | ba history notes

 हैदर अली का उत्थान


हैदर अली का जन्म 1722 ई॰ में हुआ था। उसमें साहसी व्यक्ति के गुण थे। वह मैसूर की सेना में शामिल हो गया था।  वह बहादुर था तथा अवसर का लाभ उठाने के गुण थे। नंदराज ( Nanjaraja wodyar) ने उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसे 500 सिपाहियों का कमांडर बना दिया था।

मैसूर, हैदराबाद राज्य के आधीन था। 1748 ई. में नासिरजंग के सिहांसन ग्रहण करने के अवसर पर मैसूर की ओर से हैदर अली दरबार में उपस्थित था। नासिर जंग की हत्या के बाद हैदर अली बहुत अधिक धन लूटकर ले गया । बताया जाता हैं कि प्लासी के युद्ध  के बाद अंग्रेजों के हाथा जितना धन लगा उससे कहीं ज्यादा हैदर अली के हाथ लगा ।उस धन से हैदर अली ने अपनी सेना को बढ़ाया तथा उनका प्रशिक्षण फ्रांसीसियों से करवाया ।

कर्नाटक के दूसरे युद्ध में नंदराज ने मुहम्मद अली का साथ दिया । इस सहायता के बदले मुहम्मद अली में त्रियनापल्ली का क्षेत्र देनो का वचन दिया । परंतु युद्ध के बाद उसने क्षेत्र देने से इन्कार कर दिया । मैसूर को विवश होकर कर्नाटक पर आक्रमण करना पड़ा ।

इस युद्ध में अंग्रेजों ने कर्नाटक का साथ दिया । हैदर अली ने इन सेनाओं पर पीछे से आक्रमण करना उन्हें पराजित कर दिया । इस सफलता से खुश होकर नंदराज ने  हैदर अली को डंडीगुल क्षेत्र का दीवान बना दिया ।

हैदर अली ने पोलिगारों पर हमला करके उन्हें भी अपनी सेना में शामिल कर लिया । 

1758 ई0 के बाद मैसूर के राजा तथा नंदराज के मध्य मतभेद हो गया जो बाद में युद्ध में बदल गया । राजा को हार का सामना करना पड़ा ।

इसके पश्चात नंदराज तथा उसके भाई देवराज के मध्य भी मतभेद हो गया। इसके कारण मैसूर की आर्थिक स्थिति लड़खड़ाने लगी। सैनिकों का वेतन भी लम्बे समय से नही दिया था।

कुछ समय बाद राजा तथा नंदराज व देवराज सभी में मेल हो गया । हैदर अली की कार्यकुशलता को देखते हुए मैसूर का तमाम शासन उसके हाथों सौंप दिया गया।

हैदर की की मृत्यु 1782 ई में द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान हुई। 






1 Comments

Previous Post Next Post