आधुनिक इतिहास लेखन के स्रोत | aadhunik Bhartiya itihas lekhan | | ba history

•आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन की स्रोत सामग्री

•आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन  के औपनिवेशिक स्रोत

•आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन के देेसी स्रोत


आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन के स्रोतों को प्राथमिक रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है।

1. औपनिवेशिक स्रोत 

2. देसी स्रोत


औपनिवेशिक स्रोत 

औपनिवेशिक स्रोतों के अंतर्गत निम्नलिखित स्रोत आते हैं।

•अधिनियम व कानून

•सरकारी दस्तावेज / रिपोर्ट

•गैर सरकारी रिपोर्ट


1• अधिनियम व कानून

1773 ई. में ब्रिटिश ससंद ने रेग्यूलेटिंग एक्ट पास करके भारत के शासन में हस्तक्षेप करना आरंभ किया। यह अधिनियम भारतीय शासन को शासन को सुव्यवस्थित करने में नाकाम रहा । अत: शीघ्र ही 1784 में पिट्स इण्डिया एक्ट लागू किया गया

भारत में कम्पनी के व्यापारिक एकाधिकार की आलोचना होने लगी । इसलिए 1813 में कम्पनी के एकाधिकार को सीमित कर दिया गया तथा 1833 में कम्पनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूर्णतया समाप्त कर दिया गया  । इस प्रकार विभिन्न अधिनियम तथा कानूनों के माध्यम से इतिहासकार भारत में कम्पनीराज तथा ब्रिटिश शासन के नियंत्रण का अध्ययन करते हैं।


2• सरकारी रिपोर्ट  

सरकारी रिपोर्ट 2 प्रकार की होती थी -

दैनिक रिपोर्ट, जिसे गुप्तचर विभाग या  पुलिस विभाग द्वारा तैयार किया जाता था ।

एवं किसी विशेष अध्ययन की रिपोर्ट


1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज सरकार का भारतीय सूचना स्रोतों पर विश्वास करना असंभव हो गया था ।  इसलिए सूचनाओं के लिए गुप्तचर विभाग का गठन किया गया ताकि विद्रोहियों तथा क्रांतिकारियों की गतिविधियों की व्यापक जानकारी प्राप्त की जा सके।

दूसरे प्रकार की रिपोर्टों को किसी व्यापक अध्ययन (जनगणना, जाति, धर्म व भाषा आदि) के पश्चात तैयार किया जाता था

इन रिपोर्टो के आधार पर इतिहासकारों को सरकारी दृष्टिकोण तथा राष्ट्रीय आंदोलनों के अध्ययन के लिए काफी सामग्री मिलती है।


3• गैर सरकारी रिपोर्ट

गैर सरकारी दस्तावेजों में अधिकारियों के निजी पत्र-व्यवहार तथा आत्मकथाओं आदि को रखा जाता है। गैर सरकारी रिपोर्टों से जो सूचनाएं मिलती है वे कहीं अन्यत्र उपलब्ध नहीं होती, क्योंकि ये पत्र एवं विवरण आदि अप्रकाशित होते हैं। इस प्रकार के स्रोतों को प्राप्त कर पुस्तकालयों में रखा गया है जहां इनका अध्ययन किया जा सकता.



देसी स्रोत या अन-औपनिवेशिक स्रोत 

देसी स्रोतों का विवरण निम्नवत है -


1• पुनर्जागरण के स्रोत

भारतीय पुनर्जागरण के नेता अपने विचारों एवं मांगों को प्रचारित करने के लिए पत्र-पत्रिकाएं निकालते थे उदाहरणस्वरूप - 
राजाराममोहन राय ने अपने विचारों के प्रसार के लिए मिरात-उल-अखवार एवं  सवांद कौमुद नामक पत्र निकाले । इसके अलावा ब्रहम समाज, देव समाज, प्रार्थना समाज आदि संगठनों के लिखित दस्तावेजों से भी आधुनिक भारत के इतिहास की बहुत जानकारी मिलती है।


2•राष्ट्रीय आंदोलन के दस्तावेज 

राष्ट्रीय आंदोलन अत्यंत व्यापक आंदोलन था। उसमें काफी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया । इनमें से अनेक प्रतिनिधियों ने अपने पत्र तथा लेख छोड़े हैं।

उदाहरण के लिए केवल गांधी जी के लेखों तथा भाषणों को संकलित कर 100 खण्डों में छापा गया है। इसे Collected works of Mahatma Gandhi के नाम से प्रकाशित किया गया

इसके अलावा हिन्दू महासभा, मुस्लिम लीग, अकाली दल आदि महत्वपूर्ण दलों की गतिविधियों के बारे मे लिखित दस्तावेज उपलब्ध हैं।

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Adhunik Bharat ka itihas





1 Comments

  1. Thanks bro I was searching for short answer

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