समाजवाद
समाजवाद का अर्थ एक ऐसे समाज से है -
•जो शोषण मुक्त हो तथा समानता पर आधारित हो।
•जिसमें स्त्रियों व पुरुषों को समान स्वतंत्रता प्राप्त हो।
•जिसमें, उत्पादन के साधनों तथा समस्त समपत्ति पर समाज के सभी वर्गों के लोगों का समान रूप से अधिकार होता है।
•जो किसानों तथा मजदूरों का पोषक होता है।
समाजवाद का उदय कब व कैसे हुआ ?
औद्योगिक क्रांति के पश्चात समाज में दो वर्गों का उदय एक साथ ही अस्तित्व में आया - एक पूँजीपती वर्ग, जो इन उद्योगों के मालिक थे तथा दूसरा श्रमिक वर्ग जो मेहनत मजदूरी करके उत्पादन को बढ़ाते थे ।
पूँजीपती वर्ग द्वारा श्रमिकों का शोषण किया जाता था। 15-18 पर घंटे काम करने पर भी उन्हें उचित मजदूरी नहीं दी जाती थी। उनके आवास, शिक्षा, स्वास्थ आदि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था ।
इसके फलस्वरूप ही समाजवादी विचारधारा का उदय हुआ, जो मजदूरों की पोषक तथा पूँजीपतियों की विरोधी थी।
भारत में समाजवाद का उदय
भारत में समाजवादी विचारधारा का उदय ब्रिटिश शासन काल में हुआ। प्लासी विजय के बाद अंग्रेजों ने बंगाल के समस्त संसाधनों को हस्तगत कर लिया। लैंड रिवेन्यू सिस्टम लागू करने के बाद किसानों का जबरदस्त शोषण प्रारंभ हुआ।
करों के अधिक बोझ, ब्रिटिश आर्थिक नीति तथा बार-बार पड़ने वाले अकालों ने किसानों का मनोबल पूरी तरह से तोड़ दिया और उनकी दशा अत्यंत दयनीय हो गई।
अंग्रेजों ने भारत में अपना शासन स्थायी करने के लिए यहां के राजा महाराजाओं, जमींदारों, साहूकारों तथा पूँजीपतियों को अपना मित्र बनाया तथा मजदूरों एवं किसानों का शोषण करने की पूर्ण स्वतंत्रता दे दी ।
करों में इतनी ज्यादा वृद्धि थी कि उन्हे चुकाने के बाद किसानों के पास कुछ नही बचता था ।
प्रथम विश्वयुद्ध तथा इंगलैंड में औद्योगिक क्रांति के बाद भारत में नए कल-कारखानों तथा बागानों में असीम वृद्धि हुई। इसलिए मजदूरों की संख्या भी बढ़ती चली गई।
युद्ध के समय मजदूरों ने मेहनत करके उत्पादन को बढ़ाया, जिससे कारखानों के मालिकों की आय में अत्यधिक वृद्धि हुई मजदूरों की मजदूरी नही बढ़ी बल्कि युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने से उनकी मजदूरी में और कमी आ गई।
15 से 18 घंटे काम करने के पश्चात भी उन्हें इतनी मजदूरी नही मिलती थी कि दो वक्त का भोजन ठीक से कर सकें । उन्हें गंदी बस्तियों में अंधेरे कमरे में रखा जाता था जहां पानी, सफाई आदि की कोई व्यवस्था नही थी। स्त्रियों तथा बच्चों तक से काम करवाया जाता था ।
मिल मालिकों के इस शोषण के फलस्वरूप किसानों तथा श्रमिकों में जबरदस्त असंतोष व आक्रोश की भावना पनपने लगी। इन परिस्थितियों के कारण भारत में समाजवादी विचारधारा का प्रवेश हुआ ।
भारत में अनेक मजदूर यूनियन तथा किसान पार्टी का जन्म हुआ। समाजवादी विचारधारा के तहत अब श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों को लेकर अधिक सजग हो उठे।
इस प्रकार भारत मे समाजवादी विचारधारा का उदय हुआ।


