धन निकासी / धन का निष्कासन
भारतीय अर्थशास्त्रीयों के अनुसार भारत से ब्रिटेन को होने वाला धन का वह नियमित प्रवाह, जिसके बदले भारत को मुनाफा नही मिलता, भारतीय धन निकासी है !
धन निकासी के सिद्धांत के केन्द्रीय तर्क के अनुसार भारत के सकल उत्पाद का एक अंश ब्रिटेन को निर्यात कर दिया जाता है। और इस तरह वह अपने देश की पूंजी निर्माण के लिए अनुपलब्ध रहता है।
धन निकासी के विभिन्न तत्व
1. होम चार्जेज
होम चार्जेज ब्रिटेन में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के कार्यनिष्पादन से जुड़े खर्चे थे जिन्हे भारत पर थोप दिया जाता था
इस मद के मुख्य खर्चे निम्न प्रकार थे
- नागरिक और सैन्य खर्चे
- विदेशों से लिए गए कर्ज का ब्याज
- ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शेयरधारकों का बोनस
- गोदाम के लिए ब्रिटेन में खरीद
2.विदेशी पूंजी निवेशों पर ब्याज
विदेशी पूंजी को मिलने वाला व्याज व मुनाफा भी भारत से निकासी का मार्ग था ।
निकासी का प्रभाव
इसके कारण भारत में पूंजी निवेश धीमा हो गया और भारत का औद्योगिकरण बाधित हुआ। दादाभाई नौरोजी के मुताबिक हर साल लगभग 150 करोड़ डॉलर ब्रिटेन जाता है। इतने धन से भारत की पूंजी में काफी बढ़ोतरी सभंव थी
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