स्वदेशी आंदोलन तथा बंगाल विभाजन | ba history

स्वदेशी आंदोलन 

      और

बंगाल विभाजन


स्वदेशी आंदोलन का अर्थ स्वदेश निर्मित वस्तुओ का इस्तेमाल एवं स्वदेशी शिक्षा पर जोर देना था । स्वदेशी आंदोलन का तत्कालिक कारण अग्रेजों द्वारा बंगाल का बंटवारा करने का निर्णय था। वैसे तो अंग्रेज दावा कर रहे थे कि उनका निर्णय प्रशासनिक कारणों से लिया गया है, क्योंकि इतने बड़े प्रांत का प्रशासन चलाना दुष्कर रहा है। लेकिन विभाजन के ढंग से ही जाहिर हो गया था कि उनका मकसद राष्ट्रीय आंदोलन की बढ़ती ताकत को कमजोर करना था ।

बंगाल का विभाजन इस तरह किया गया था कि वहाँ बगाली को दो अलग प्रशासनिक इकाईयों में बांटने के अलावा, खुद अपने प्रांत में ही अल्पसख्यक बना दिए गए थे।

बंटवारे के बाद नए प्रस्तावित प्रांत में 1 करोड़ 70 लाख बंगालियों को 3 करोड़ 70 लाख उड़िया और हिन्दी भाषियों के साथ जोड़ दिया गया।

इसके अलावा यह विभाजन धर्म के आधार पर किया गया था। खुद लार्ड कर्जन ने कहा था कि ढाका नए मुस्लिम बाहुल प्रांत की राजधानी होगी (जहाँ 1 करोड़ 80 लाख मुस्लमानों के साथ 1 करोड़ 20 लाख हिंदू होंगे)

19 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा कर दी गई । वटवारे के खिलाफ छोटे कस्बों में लोगों ने अनेक विरोध सभाएं की ।

बाद में 7 अगस्त 1905 को टाउन हॉल की सभा में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा कर दी गई।

उधर 1 सितम्बर 1905 को सरकार ने भी घोषित कर दिया कि 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन अमल में लाया जाएगा।

पूरे बंगाल में 16 अक्टूबर 1905 का दिन शोक दिवस घोषित कर दिया गया और अन्धन (चूल्हाबंदी) के बतौर मनाया गया। 

बंगाल विभाजन से आक्रोश के कारण  स्वदेशी आंदोलन बढ़ने लगा। अंग्रेजी वस्तुओं का बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री बढ़ने लगी । चरखा आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया ।

अनेक भारतीय उद्यमों की शुरुआत हुई, जिनमें कलकत्ता पॉटरीज, नेशनल टेनरी, बंगाल केमिकल्स, माहिनी मिल्स और बंग लक्ष्मी कॉटन मिल्स शामिल थे। माचिस, साबुन, तेल मिलों इत्यादि सामानों की अनेक उत्पादक इकाइयाँ स्थापित की जा रही थीं। विदेशी वस्तुओं की बड़ी-बड़ी होलियाँ जलाई जा रही थीं।


सरकार मे स्वदेशी आंदोलन को रोकने के लिए सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों, व प्रेस पर पाबंदी लगा दी । स्कूली व कॉलेजों में आंदोलन के समर्थकों को अर्थदण्ड व पुलिस द्वारा पिटाई की गई। आंदोलन के अधिकांश नेताओं को निर्वासित और गिरफ्तार कर लिया गया




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Bangal vibhajan



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