उग्रवादी आन्दोलन की उपलब्धियां और असफलाएं
उग्रवादी आन्दोलन की उपलब्धियां
•उग्रवादियों ने कांग्रेस के शिक्षित शहरी मध्यवर्गीय राजनीतिक आंदोलन को जन साधारण तक पहुंचाया था। इससे कांग्रेस के सदस्यों की संख्या सैकड़ों-हजारों में नही बल्कि लाखों में पहुंच गई थी और उसमें महानगर, छोटे शहर कस्बे तथा गांव की जनता भी सम्मिलित थी ।
•स्वशासन, स्वराज, और स्वदेशी को अपना राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक लक्ष्य बनाकर उग्रवादियों ने भारत की हीन भावना को कम करने में सफलता प्राप्त की थी।
•बंगाल विभाजन के अन्यायपूर्ण निर्णय को रद्द कराने का श्रेय काफी हद तक उग्रवादियों को जाता है।
•उग्रवादि साहित्य व पत्रकारिता ने भारतीयों में राजनैतिक चेतना जागृत करने में पर्याप्त सफलता प्राप्त की थी।
•अरविन्द घोष और स्वामी श्रद्धानंद ने प्राचीन शिक्षा पद्धति के श्रेष्ठ तत्वों को नई शिक्षा पद्धति में समाहित किया ।
•उग्रवादियों द्वारा उठाई गई स्वशासन की मांग को नकारना अब सरकार के भी बस मे नही था। 1917 में मॉन्टेग्यू की घोषणा द्वारा सरकार ने सैद्धांतिक रूप से भारत को स्वशासन प्रदान करना स्वीकार कर लिया था
उग्रवादी आंदोलन की असफलाएं
•उग्रवादी आंदोलन मूलतः उग्र हिन्दू राष्ट्रवाद था। भारत जैसे सैक्यूलर देश में गणेश उत्सव को राजैनतिक महत्व देना, मातृभूमि को भारतमाता की प्रतिष्ठा देना, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी जैसे हिन्दू शासकों को महानायक के रूप मे प्रस्तुत करना, वेद पुराण संस्कृत भाषा को अत्यधिक महत्व देना आदि ऐसी बाते थी जो अंदोलन को संकुचित तथा संकीर्ण बनाती थी।
•उग्रवादियों की विचारधारा से नरमपंथी सहमत नहीं थे क्योंकि उनकी दृष्टि में उग्रवादी राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जल्दबाजी कर रहे थे। सरकार उनकी विचारधारा को आतंकवाद से जोड़ रही थी।
•मुस्लिम, उग्रवादी आंदोलन को इस्लाम विरोधी मान रहे थे। मुस्लिमों ने 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना की।
•1911 में बंगाल विभाजन रद्द किये जाने के बाद उग्रवादी आंदोलन की उपादेयता लगभग समाप्त हो गई स्वयं लोकमान्य तिलक ने भी उग्रवादी विचारधारा का परित्याग कर दिया


🙏🏻
ReplyDeleteThanks 👍🏻
ReplyDelete📖🧎🏻
ReplyDelete