ध्वनि परिवर्तन के कारण 3rd year hindi

 This question is asked for 20 marks in 3rd year of Hindi in UTTRAKHAND OPEN UNIVERSITY and MBPG COLLEGE 

Types of questions for exam - 

ध्वनि परिवर्तन के कारणों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए 


ध्वनि परिवर्तन के कारण


भाषा की ध्वनियों में परिवर्तन एक सतत् प्रक्रिया है जो भाषा के जन्म से अबाध रूप से घटित होती रहती है। इस क्रम में अनेक ध्वनियां लुप्त हो जाती हैं, नई ध्वनियां आती हैं अथवा ध्वनि का परिवर्तित रूप (विकृत रूप) प्रचलित हो जाता है। 

भाषा में ध्वनि परिवर्तन मुख्यतः दो कारणों से होता है-

1. अभ्यंतर कारण

2. बाह्य कारण


• अभ्यंतर कारण ⇒

 ध्वनि परिवर्तन के अभ्यंतर कारण इस प्रकार हैं-

1. मुख सुख 

मुख सुख का अर्थ है - उच्चारण की सुविधा I उच्चारण की सुविधा के लिए ध्वनि परिवर्तन कई प्रकार से होता है। जैसे -

• कठिन ध्वनि को छोड़कर उच्चारण करना ।  अंग्रेजी के कई शब्दों में कुछ ध्वनियों का उच्चारण कठिनता के कारण कभी किया ही नहीं जाता। जैसे श्रनकहम - जज, ज्ञदपमि- नाइफ आदि | 

•नई ध्वनि को जोड़कर उच्चारण करना । जैसे -  स्टेशन का इस्टेशन या सटेशन

•ध्वनियों का स्थान बदलना । जैसे ब्राह्मण से ब्राम्हण

ध्वनियों को काँट छाँट कर छोटा करना । जैसे सपत्नी से सौत, अध्यापक से झा आदि ।


2. अनुकरण की पूर्णता 

भाषा अनुकरण से ही सीखी जाती हैं। यदि अज्ञानवश अनुकरण पूर्ण या सही नही होता तो उच्चारण की ध्वनि में परिवर्तन हो जाता है।

जैसे स्टेशन का इस्टेशन, स्कूल का इस्कूल आदि


3. प्रयत्न लाघव 

अर्थात उच्चारण सुविधा के लिए कम प्रयत्न करना ।
जैसे उपाध्याय का ओझा बन गया और बाद में झा ही रह गया |


4. अशिक्षा 

आशिक्षा व अज्ञान के कारण भी शब्दों का सही उच्चारण नही होता जैसे गोस्वामी का गोसाईं साधु का साहू आदि ।


5. शीघ्रता 

कभी कभी शब्दों का जल्दबाजी में उच्चारण करने से ध्वनि परिवर्तन हो जाता है जैसे किसने का किन्ने, अब ही का अभी , तब ही का तभी आदि |


6. बालाघात - 

अधिक बालाघात वाली ध्वनि कम बालाघात वाली ध्वनि को उच्चारण से बाहर कर देती है। जैसे- अभ्यंतर का भीतर , बाजार का बजार आदि 


7. भावावेश 

 भावावेश में प्राय: शब्दों की ध्वनियां बदल जाती हैं। 

जैसे - बच्चा का बच्चू, चाचा का चच्चा या चच्चू, राधा का राधे आदि । 


• बाह्य कारण →

 ध्वनि परिवर्तन के बाह्य कारण निम्न है - 


1. भौगोलिक प्रभाव 

भौगोलिक भिन्नता से उच्चारण में भिन्नता आता स्वाभाविक है भारत में अनेक भूभाग से लोग आए । उनके उच्चारण में भिन्नता रही। फलतः सिंधु का हिंदु तथा सप्ताह का हफ्ता आदि प्रचलित हो गया ।

2. सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ -

 वाराणसी का बनारस दिल्ली का देहली कलकत्ता का कोलकाता आदि क्षेत्र विशेष की सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियों की ही देन है।


3. विभिन्न भाषाओं का प्रभाव 

भारत में फारसी पुर्तगाली, फ्रेंच अंग्रेजी आदि अनेक भाषा-भाषी देशों के लोग आये जिनके सम्पर्क से हिन्दी भी प्रभावित हुई। इसके अलावा देश की क्षेत्रीय भाषाओं बंग्ला, मराठी, गुजराती आदि का भी प्रभाव पड़ा |

अंग्रेंजी के प्रभाव से, अशोक का अशोका, गुप्त का गुप्ता मिश्र का मिश्रा होना इसका उदाहरण है।


4. कविता में मात्रा, तुकबंदी या कोमलता का आग्रह 

 कविता में मात्रा तुकबंदी या कोमलता का भाव लाने के लिए कविजन ध्वनि परिवर्तन करते रहे हैं। 

जैसे - कोमलता के लिए 'ड़' की जगह 'र' (अंगड़ाई → अंगराई) 
मुस्कान की जगह मुस्क्यान ।
तुकांत के लिए रघुवीर की जगह रघुबीरा का प्रयोग आदि 



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ध्वनि परिवर्तन के कारणों को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए

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