This question is asked for 20 marks in 3rd year of Hindi in UTTRAKHAND OPEN UNIVERSITY and MBPG COLLEGE
Types of questions for exam -
ध्वनि परिवर्तन की दिशाएं
ध्वनि परिवर्तन की प्रमुख दिशाएं इस प्रकार हैं-
1. ध्वनि लोप
उच्चारण में शीघ्रता, स्वराघात या मुखसुस आदि के प्रभाव से कुछ ध्वनियाँ लुप्त हो जाती है। यही ध्वनि लोप है। ध्वनि लोप तीन तरह से होता है -
(क) स्वर लोप
स्वर लोप तीन प्रकार का होता है -
•आदि स्वर लोप
अफ़साना - फ़साना
असवार - सवार
•मध्य स्वर लोप
बलदेव - बल्देव
•अंत्य स्वर लोप
Bombe (फ्रेंच) - Bomb (अंग्रेजी )
( ख) व्यंजन लोप
व्यंजन लोप तीन प्रकार का होता है -
•आदि व्यंजन लोप
शमशान -मशान
• मध्य व्यंजन लोप
डाकिन - डाइन
उपवास - उपास
•अंत्य व्यंजन लोप
कमांड (अंग्रेजी) - कमान (हिन्दी)
(ग) अक्षर लोप
•आदि अक्षर लोप
•मध्य अक्षर लोप
फलाहारी - फलारी
दस्तखत - दस्खत
•अंत्य अक्षर लोप
व्यंग्य -व्यंग
(घ) समध्वनि लोप -
खरीददार - खरीदार
2. ध्वनि आगमन
यह लोप का उल्टा है। इसमें नई ध्वनि आती है।
(क) स्वरागम
•आदि स्वरागम
स्नान - अस्नान
स्तुति - अस्तुति
•मध्य स्वरागम
गर्म - गरम
पूर्व - पूरब
प्रजा - परजा
भक्त - भगत
• अंत्य स्वरागम
दवा - दवाई
(ख) व्यंजनागम
व्यंजनागम तीन प्रकार का होता है -
•आदि व्यंजनागम
उल्लास - हुलास
•मध्य व्यंजनागम
वानर - बन्दर
•अत्यं व्यंजनागम
परवा - परवाह
(ग) अक्षरागम
• आदि अक्षरागम
गुजा - घुँगुची
•मध्य अक्षरागम
खल - खरल
•अंत्य अक्षरागम
आँक - आँकड़ा
मुख- मुखड़ा
3. ध्वनि विपर्यय
इसमें किसी शब्द के स्वर, व्यंजन या अक्षर का स्थान परिवर्तन हो जाता है ।
जैसे - मतलब से मतबल होना
ध्वनि विपर्यय की विभिन्न स्थितियां इस प्रकार हैं -
•स्वर विपर्यय
पागल - पगला
•व्यंजन विपर्यय
खुरदा -खुदरा
ब्राह्मण - ब्राम्हण
•अक्षर विपर्यय
मतलब - मतबल
4.समीकरण
इसमें 'त्' ध्वनि ने 'र्' ध्वनि को प्रभावित करके 'त्' बना दिया। समीकरण स्वर और व्यंजन दोनो में होता है।
• स्वर समीकरण
अंगुली - उँगली
•व्यंजन समीकरण
शर्करा - शक्कर
• अपूर्ण समीकरण
डाकघर - डाग्घर
•पारस्परिक व्यंजन समीकरण
सत्य - सच
5. विषमीकरण
यह समीकरण का उल्टा है। इसमें दो समान ध्वनियों में एक ध्वनि विषम हो जाती है।
कंकन - कंगन
काक - काग
6. अनुनासिकता -
अनुनासिकता दो प्रकार से होती है -
• सकारण अनुनासिकता
चन्द्र - चाँद
• अकारण अनुनासिकता
अश्रु - आँसू
श्वास - साँस
7. मात्रा भेद
मुख-सुख या प्रयत्न लाघव के कारण कभी ह्स्व स्वर का दीर्घ या दीर्घ स्वर का ह्स्व स्वर बना दिया जाता है।
• दीर्घ से हस्व स्वर
पाताल - पताल
आफिसर -अफसर
आराम- अराम
• हस्व से दीर्घ स्वर
गुरु - गुरू
लज्जा - लाज
8. घोषीकरण
इस स्थिती में उच्चारण की सुविधा के लिए कुछ शब्दों में घोष ध्वनि अघोष और अघोष ध्वनि घोष हो जाती है।
• घोष से अघोषीकरण
खूबसूरत - खपसूरत
• अघोष से घोषीकरण
शती - सदी
शाक - साग
मकर - मगर
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ध्वनि परिवर्तन की दिशाओं को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए
ध्वनि परिवर्तन की दिशाओं पर एक टिप्पणी लिखिए
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